UP नामांतरण स्थिति 2026: दाखिल-खारिज Online Status देखें

UP नामांतरण स्थिति देखने के लिए vaad.up.nic.in खोलिए। “वाद खोज विधि” में अपनी कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या डालिए और “विवरण देखें” पर click कीजिए। स्क्रीन पर आपके नामांतरण वाद की स्थिति, अगली सुनवाई की तिथि और आदेश दिख जाएगा। यह सेवा बिल्कुल free है।

इस page पर आपको नामांतरण का पूरा क्रम, online आवेदन का तरीका, स्थिति देखने के steps और देरी होने पर क्या करना है, सब मिलेगा।

एक नज़र में — UP नामांतरण (दाखिल-खारिज)

  • Status और online आवेदन: vaad.up.nic.in (राजस्व न्यायालय कम्प्यूटरीकृत प्रबन्धन प्रणाली)
  • क़ानून: UP Revenue Code, 2006 की धारा 34 (आवेदन) और धारा 35 (आदेश)
  • कौन फ़ैसला करता है: तहसीलदार न्यायालय
  • समय-सीमा: अविवादित मामला 45 दिन, विवादित मामला 90 दिन, वाद दर्ज होने की तारीख से
  • नाम चढ़ने के बाद: upbhulekh.gov.in पर वर्तमान खतौनी में नाम देखिए

नामांतरण (दाखिल-खारिज) क्या है और क्यों ज़रूरी है

नामांतरण वह प्रक्रिया है जिसमें बिक्री, दान, पारिवारिक समझौते या विरासत के बाद खतौनी में नए मालिक का नाम चढ़ता है। इसे दाखिल-खारिज और mutation भी कहते हैं। मतलब सीधा है: नए मालिक का नाम दाखिल होता है और पुराने का खारिज।

सीधी बात — बैनामा (registry) साबित करता है कि ज़मीन आपने खरीदी। पर सरकारी record यानी खतौनी आपको मालिक तभी मानती है जब नामांतरण हो जाए। जब तक नाम नहीं चढ़ता, तब तक ये काम अटकते हैं:

  • bank loan या ज़मीन गिरवी रखना
  • PM-Kisan और दूसरी सरकारी योजनाएँ
  • आगे ज़मीन बेचना

बहुत लोग मानते हैं कि registry होते ही नाम अपने-आप चढ़ जाता है। ज़्यादातर मामलों में ऐसा नहीं है। नामांतरण एक अलग वाद है, जो तहसीलदार न्यायालय में चलता है।

नामांतरण कैसे होता है — पूरा क्रम

  1. बैनामा / registry: Sub-Registrar कार्यालय में (igrsup.gov.in वाले विभाग में)।
  2. धारा 34 में आवेदन: ज़मीन पाने वाला व्यक्ति तहसीलदार को सूचना देता है (आर.सी. प्रपत्र-11)। यह आवेदन अब online भी होता है।
  3. वाद दर्ज: आवेदन तहसीलदार न्यायालय में नामांतरण वाद के रूप में दर्ज होता है और एक कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या मिलती है।
  4. उद्घोषणा (धारा 35): तहसीलदार उद्घोषणा जारी करते हैं (आर.सी. प्रपत्र-12), ताकि किसी को आपत्ति हो तो वह दर्ज करा सके।
  5. आदेश: आपत्ति न हो तो खतौनी संशोधित करने का आदेश होता है। आपत्ति हो तो सुनवाई के बाद फ़ैसला होता है।
  6. खतौनी update: आदेश के बाद आपका नाम खतौनी में दर्ज हो जाता है।

नामांतरण पर सरकार द्वारा तय नामांतरण शुल्क लगता है, जो समय-समय पर शासनादेश से बदलता है। सही राशि अपनी तहसील से पूछ लीजिए।

धारा 34 में नामांतरण का Online आवेदन कैसे करें

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vaad.up.nic.in पर धारा 34 के अंतर्गत नामांतरण का online आवेदन — 6 आसान steps

पूरा तरीका, step by step:

  • vaad.up.nic.in खोलिए।
  • “भूमि के नामान्तरण हेतु उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता – 2006 धारा 34 के अन्तर्गत ऑनलाइन आवेदन” वाले link पर click कीजिए।
  • अपना mobile number डालिए और OTP से verify कीजिए।
  • पूरा विवरण भरिए: ज़मीन, बैनामा, विक्रेता और आपकी जानकारी। जो दस्तावेज़ माँगे जाएँ (जैसे बैनामे की प्रति), वे upload कीजिए।
  • घोषणा (declaration) पर tick करके “आवेदन सुरक्षित करें” दबाइए।
  • आवेदन सीधे तहसीलदार न्यायालय में अपने-आप दर्ज हो जाता है।
  • अपना आवेदन “कुल दर्ज आवेदन पत्र” option से print कर लीजिए।

एक काम की बात — वही mobile number डालिए जो आपके पास हमेशा रहे। आगे की जानकारी उसी से जुड़ी रहती है।

UP नामांतरण स्थिति कैसे देखें

  • vaad.up.nic.in खोलिए।
  • “वाद खोज विधि” में “कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या” चुनिए।
  • अपनी वाद संख्या डालिए और “प्रदर्शित करें” पर click कीजिए।
  • अपने वाद के सामने “विवरण देखें” दबाइए।

स्क्रीन पर पुरानी वाद संख्या, कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या, अधिनियम और धारा, वादी/प्रतिवादी, वाद की स्थिति और सुनवाई की तिथि दिख जाएगी। अगर आदेश हो चुका है, तो वह भी यहीं मिलता है।

वाद संख्या नहीं पता? यह आपकी आवेदन की print या तहसील की रसीद पर लिखी होती है। “वाद खोज विधि” में दूसरे खोज विकल्प भी हैं, पर कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या से खोजना सबसे भरोसेमंद है।

स्थिति के शब्दों का मतलब:

  • विचाराधीन: मामला अभी चल रहा है, फ़ैसला बाकी है।
  • निस्तारित: मामला निपट चुका है। अब आदेश देखिए कि नामांतरण मंज़ूर हुआ या नहीं।
  • सुनवाई की तिथि: इस दिन तहसीलदार न्यायालय में तारीख़ है।

आदेश के बाद खतौनी में नाम कैसे जाँचें

वाद निस्तारित होने का मतलब यह नहीं कि खतौनी उसी दिन बदल गई। आदेश के बाद upbhulekh.gov.in पर अपनी खतौनी खोलिए और “वर्तमान खतौनी” चुनिए। उसमें अपना नाम ज़रूर देखिए। खतौनी कैसे देखें — इसका पूरा तरीका हमारे homepage पर है।

नामांतरण में कितना समय लगता है

UP Revenue Code Rules, 2016 के अनुसार, तहसीलदार को अविवादित नामांतरण 45 दिन में और विवादित नामांतरण 90 दिन में निपटाने का प्रयास करना होता है। यह समय वाद दर्ज होने की तारीख से गिना जाता है, registry की तारीख से नहीं। शासन ने इस समय-सीमा का पालन कराने की ज़िम्मेदारी DM और मंडलायुक्त पर डाली है।

आम समस्याएँ और उनके पक्के हल

  • 45 दिन बाद भी फ़ैसला नहीं हुआ: पहले vaad.up.nic.in पर स्थिति और अगली तारीख़ देखिए। फिर अपने लेखपाल और तहसीलदार से मिलिए। जवाब न मिले तो Jansunwai पर शिकायत दर्ज कीजिए।
  • वाद संख्या खो गई: तहसील के नामांतरण पटल पर बैनामे की details देकर संख्या पता कीजिए।
  • किसी ने आपत्ति दर्ज कर दी: अब मामला विवादित है और सुनवाई होगी। हर तारीख़ पर मौजूद रहिए, और ज़रूरत हो तो वकील से सलाह लीजिए।
  • आदेश हो गया, पर खतौनी में नाम नहीं: कुछ दिन रुककर वर्तमान खतौनी दोबारा देखिए। फिर भी न दिखे तो आदेश की प्रति लेकर तहसील जाइए।

एक नियम याद रखिए — नामांतरण “जल्दी कराने” के नाम पर किसी agent को पैसे मत दीजिए। आवेदन और स्थिति दोनों आप ख़ुद free में देख सकते हैं; सिर्फ़ सरकारी नामांतरण शुल्क देना होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या registry के बाद नाम अपने-आप खतौनी में चढ़ जाता है?

ज़्यादातर मामलों में नहीं। धारा 34 में नामांतरण का आवेदन अलग से होता है। आपके जिले में कोई नई व्यवस्था लागू हुई हो, तो तहसील से पुष्टि कर लीजिए।

नामांतरण की स्थिति कहाँ देखें?

vaad.up.nic.in पर “वाद खोज विधि” में कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या डालकर।

क्या नामांतरण का आवेदन online हो सकता है?

हाँ। vaad.up.nic.in पर धारा 34 के अंतर्गत mobile OTP से online आवेदन होता है।

नामांतरण और वरासत में क्या फ़र्क है?

नामांतरण बिक्री, दान या समझौते जैसे अंतरण के बाद होता है (धारा 34)। वरासत, ज़मीन मालिक की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों का नाम चढ़ाने की प्रक्रिया है, और यह अलग धारा व अलग आवेदन से होती है।

दाखिल-खारिज में कितने दिन लगते हैं?

अविवादित मामले में 45 दिन और विवादित मामले में 90 दिन, वाद दर्ज होने से।

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